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Union Health Ministry Releases 2019-21 National Family Health Survey (NFHS-5)

Mahendra Guru

- Dr. Vinod Kumar Paul, Member (Health), NITI Aayog and Rajesh Bhushan,Secretary, Union Ministry of Health and FamilyWelfare, Government of India, released the Factsheets of key indicators onpopulation, reproductive and child health, family welfare, nutrition and others forIndia and 14 States/UTs (clubbed under Phase-II) of the 2019-21 National Family Health Survey (NFHS-5).
- नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. विनोद कुमार पॉलऔर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय केसचिव राजेश भूषण ने भारत और 14 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (द्वितीय चरण के तहत क्लब) के लिए जनसंख्या, प्रजनन तथा बाल स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, पोषण एवं अन्य पर प्रमुख संकेतकों के 2019-21 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) तथ्यपत्रक (फैक्टशीट) जारी किए।


National Family Health Survey / राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण

- For the first time in the country, the population of women has increased in comparison to men, which is being considered very good news for our country. As India has been known as a nation of “missing women”, achieving this milestone is a good step forward. The country has now 1,020 females for every 1000 males. At the same time, this record has also been made for the first time after independence when the population of women has exceeded 1000 as compared to men.
- देश में महिलाओं को लेकर बहुत ही अच्छी खबर आई है। दरअसल, देश में पहली बार पुरुषों की तुलना में महिलाओं की आबादी में इजाफा हुआ है। अब हर 1000 पुरुषों पर 1,020 महिलाएं हैं। वहीं आजादी के बाद ये भी पहली बार रिकॉर्ड बना है जब पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की आबादी 1000 से अधिक हो गई है।

- Another good news for India is that the sex ratio at birth has also improved, which in the year 2015-16, it was 919 girls per 1000 children, has improved to 929 girls per 1000 children in 2019-21.
- एक और अच्छी खबर यह है कि जन्म के समय भी सेक्स अनुपात में सुधार हुआ है। 2015-16 में ये प्रति 1000 बच्चों पर 919 बच्चियों का थो, जो 2019-21 में सुधकर प्रति 1000 बच्चों पर 929 बच्चियों का हो गया है।

Villages showing more improvement as compared to cities / गांव अब भी शहर से आगे

- The National Family Health Survey (NFHS-5) data compares the sex ratio in village and city. According to the survey, the sex ratio has been better in villages than in cities. While there are 1,037 females for every 1,000 males in villages, there are 985 females in cities. It must be noted that earlier in NFHS-4 (2019-2020) there were 1,009 females per 1,000 males in villages and this figure was 956 in cities.
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण( NFHS-5) के आंकड़ों में गांव और शहर में सेक्स अनुपात की तुलना की गई है। सर्वे के अनुसार सेक्स अनुपात शहरों की तुलना में गांवों में ज्यादा बेहतार हुआ है। गांवों में जहां हर 1,000 पुरुषों पर 1,037 महिलाएं हैं, वहीं शहरों में 985 महिलाएं हैं। बता दें कि इससे पहले NFHS-4(2019-2020) में गांवों में प्रति 1,000 पुरुषों पर 1,009 महिलाएं थीं और शहरों में ये आंकड़ा 956 का था।

The declining fertility rate in the country / देश में प्रजनन दर में गिरावट

- Good news has been doing rounds considering the increasing population in the country. According to the second phase of the National Family Health Survey-5, the country's total fertility rate (TFR) or the average number of children a woman gives birth to in her lifetime has come down from 2.2 to 2. Whereas the Contraceptive Prevalence Rate (CPR) has also increased and has increased from 54% to 67%.
- देश की बढ़ती जनसंख्या को लेकर अच्छी खबर सामने आ रही है। दरअसल, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के दूसरे चरण के अनुसार, देश की कुल प्रजनन दर (TFR) या एक महिला द्वारा अपने जीवनकाल में बच्चों को जन्म देने की औसत संख्या 2.2 से घटकर 2 हो गई है। जबकि कन्ट्रासेप्टिव प्रिवलेंस रेट (Contraceptive Prevalence Rate, CPR) में भी वृद्धि हुई हैं और यह 54 फीसदी से बढ़कर 67 फीसदी तक हो गई है।


The key results from India and Phase-II States/UTs NFHS-5 Factsheets areas below / भारत और दूसरे चरण के राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के एनएफएचएस-5 फैक्टशीट क्षेत्रों के मुख्य परिणाम नीचे दिए गए हैं:

- The Total Fertility Rates (TFR), an average number of children per womenhas further declined from 2.2 to 2.0 at the national level and all 14States/UT’s ranging from 1.4 in Chandigarh to 2.4 in Uttar Pradesh. All Phase-II States have achieved replacement level of fertility (2.1) exceptMadhya Pradesh, Rajasthan, Jharkhand and Uttar Pradesh.

- कुल प्रजनन दर (टीएफआर), राष्ट्रीय स्तर पर प्रति महिला बच्चों की औसत संख्या 2.2 से घटकर 2.0 हो गई है और सभी 14 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ में 1.4 से लेकर उत्तर प्रदेश में 2.4 हो गई है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और उत्तर प्रदेश को छोड़कर सभी चरण-II राज्यों ने प्रजनन क्षमता का प्रतिस्थापन स्तर (2.1) हासिल कर लिया है।

- Overall Contraceptive Prevalence Rate (CPR) has increased substantially from 54% to 67% at all-India level and in almost all Phase-II States/UTswith an exception of Punjab. Use of modern methods of contraceptives hasalso increased in almost all States/UTs.
- समग्र गर्भनिरोधक प्रसार दर (सीपीआर) अखिल भारतीय स्तर पर और पंजाब को छोड़कर लगभग सभी चरण-II राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 54 प्रतिशत से 67 प्रतिशत तक बढ़ गई है। लगभग सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में गर्भ निरोधकों के आधुनिक तरीकों का उपयोग भी बढ़ा है।

- Unmet needs of family Planning have witnessed a significant decline from13 per cent to 9 per cent at all-India level and in most of the Phase-II States/UTs. The unmet need for spacing which remained a major issue inIndia in the past has come down to less than 10 per cent in all the States except Jharkhand (12%), Arunachal Pradesh (13%) and Uttar Pradesh(13%).
- परिवार नियोजन की अधूरी जरूरतों में अखिल भारतीय स्तर पर और दूसरे चरण के अधिकांश राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 13 प्रतिशत से 9 प्रतिशत की महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है। अंतराल की अपूर्ण आवश्यकता जो अतीत में भारत में एक प्रमुख मुद्दा बनी हुई थी, झारखंड (12 प्रतिशत), अरुणाचल प्रदेश (13 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (13 प्रतिशत) को छोड़कर सभी राज्यों में घटकर 10 प्रतिशत से कम हो गई है।

- Full immunization drive among children aged 12-23 months has recorded substantial improvement from 62 per cent to 76 per cent at all-India level.11out of 14 States/UTs has more than three-fourth of children aged 12-23 months with fully immunization and it is highest (90%) for Odisha.
- 12-23 महीने की आयु के बच्चों के बीच पूर्ण टीकाकरण अभियान में अखिल भारतीय स्तर पर 62 प्रतिशत से 76 प्रतिशत तक पर्याप्त सुधार दर्ज किया गया है। 14 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से 11 में 12-23 महीने की आयु के पूर्णटीकाकरण वालेतीन-चौथाई से अधिक बच्चे हैं और यह ओडिशा के लिए अधिकतम (90 प्रतिशत) है।

- On comparing NFHS-4 and NFHS-5 data, the increase in full immunization coverage is observed to be expeditious in many states and UTs; More than50 per cent of Phase-II States/ UTs are sharing over 10 percentage pointsduring the short span of 4 years. This can be attributed to the flagship initiative of Mission Indradhanush launched by the government since 2015.
- एनएफएचएस-4 और एनएफएचएस-5 डेटा की तुलना करने पर, कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज में तेजवृद्धि देखी गई है; चरण- II के 50 प्रतिशत से अधिक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश 4 वर्षों की छोटी अवधि के दौरान 10 प्रतिशत से अधिक प्वाइंट साझा कर रहे हैं। इसका श्रेयसरकार द्वारा 2015 से शुरू किए गए मिशन इंद्रधनुष की प्रमुख पहल को दिया जा सकता है।

- There is an increase from 51 per cent to 58 per cent of women receiving therecommended four or more ANC visits byhealth providers at all-India level.
- अखिल भारतीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं द्वारा अनुशंसित चार या अधिक एएनसी विजिट पाने वाली महिलाओं की संख्या 51 प्रतिशत से बढ़कर 58 प्रतिशत हो गई है।

Also, all the Phase-II States/UTs have show nimprovement except Punjab between 2015-16 to 2019-20. / साथ ही, 2015-16 से 2019-20 के बीच पंजाब को छोड़कर सभी चरण-II राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने सुधार दर्शाया है।

- Institutional births have increased substantially from 79 per cent to 89 percent at all-India Level. Institutional delivery is 100 per cent in Puducherryand Tamil Nadu and more than 90 per cent in 7 States/UTs out of 12 PhaseII States/UTs.
- अखिल भारतीय स्तर पर अस्पतालों में जन्म 79 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गए हैं। पुद्दुचेरी और तमिलनाडु में अस्पतालों में प्रसव 100 प्रतिशत है और दूसरे चरण के 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से 7 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 90 प्रतिशत से अधिक है।

- Along with an increase in institutional births, there has also been asubstantial increase in C-section deliveries in many States/UTs especially inprivate health facilities.
- अस्पतालों में जन्मों की संख्या वृद्धि के साथ-साथ, कई राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में विशेष रूप से निजी स्वास्थ्य सुविधाओं में सी-सेक्शन प्रसव में भी पर्याप्त वृद्धि हुई है।

- Child Nutrition indicators shows a slight improvement at all-India level as Stunting has declined from 38 per cent to 36 per cent, wasting from 21 per cent to 19 per cent and underweight from 36 per cent to 32 percent at allIndia level. In all phase-II States/UTs situation has improved in respect ofchild nutrition but the change is not significant as drastic changes in respectof these indicators are unlikely in short span period.
- अखिल भारतीय स्तर पर बाल पोषण संकेतक थोड़ा सुधार दिखाते हैं, क्योंकि स्टंटिंग 38 प्रतिशत से घटकर 36 प्रतिशत हो गया है, 21 प्रतिशत से 19 प्रतिशत और कम वजन 36 प्रतिशत से घटकर 32 प्रतिशत हो गया है। सभी चरण-II राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में बाल पोषण के संबंध में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन यह परिवर्तन महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि इन संकेतकों के संबंध में बहुत कम अवधि में भारी बदलाव की संभावना नहीं है।

- Anaemia among children and women continues to be a cause of concern.More than half of the children and women (including pregnant women) areanemic in all the phase-II States/UTs and all-India level compared to NFHS4, in spite of substantial increase in the composition of iron folic acid (IFA)tablets by pregnant women for 180 days or more.
- बच्चों और महिलाओं में एनीमिया चिंता का विषय बना हुआ है। एनएफएचएस-4 की तुलना में सभी चरण-II राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और अखिल भारतीय स्तर पर गर्भवती महिलाओं द्वारा 180 दिनों या उससे अधिक समय तक आयरन फोलिक एसिड (आईएफए) गोलियों के सेवन के बावजूदआधे से अधिक बच्चे और महिलाएं (गर्भवती महिलाओं सहित) एनीमिया से ग्रस्त हैं।

- Exclusive breastfeeding to children under age 6 months has shown animprovement in all-India level from 55 percent in 2015-16 to 64 per cent in 2019-21. All the phase-II States/UTs are also showing a considerable progress.
- 6 महीने से कम उम्र के बच्चों को विशेष रूप से स्तनपान कराने से अखिल भारतीय स्तर पर 2015-16 में 55 प्रतिशत से 2019-21 में 64 प्रतिशत तक सुधार हुआ है। दूसरे चरण के सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश भी काफी प्रगति दिखा रहे हैं।

- Women's empowerment indicators portray considerable improvement at all India level and across all the phase-II States/UTs. Significant progress hasbeen recorded between NFHS-4 and NFHS-5 in regard to women operating bank accounts from 53 percent to 79 percent at all-India level. For instance,in the case of Madhya Pradesh the increase was to the tune of 37 percentage point from 37 per cent to 75 per cent. More than 70 per cent of women inevery state and UTs in the second phase have operational bank accounts.
- महिला सशक्तिकरण संकेतक अखिल भारतीय स्तर पर और सभी चरण-II राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में उल्लेखनीय सुधार दर्शाते हैं। अखिल भारतीय स्तर पर महिलाओं के बैंक खाते संचालित करने के संबंध में एनएफएचएस-4 और एनएफएचएस-5 के बीच उल्लेखनीय प्रगति 53 प्रतिशत से 79 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश के मामले में 37 प्रतिशत प्वाइंट तक वृद्धि हुई थी, जो 37 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक थी। दूसरे चरण में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के बैंक खाते चालू हैं।

- The States and UTs which were surveyed in the Phase-II are Arunachal Pradesh, Chandigarh, Chhattisgarh, Haryana, Jharkhand, Madhya Pradesh, NCT of Delhi, Odisha, Puducherry, Punjab, Rajasthan, Tamil Nadu, Uttar Pradesh andUttarakhand. The findings of NFHS-5 in respect of 22 States & UTs covered in Phase-I were released in December, 2020.
- चरण- II में जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का सर्वेक्षण किया गया, वे हैं अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रदिल्ली, ओडिशा, पुद्दुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड। पहले चरण में शामिल 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संबंध में एनएफएचएस-5 के निष्कर्ष दिसंबर, 2020 में जारी किए गए थे।

- The main objective of successive rounds of the NFHS is to provide reliableand comparable data relating to health and family welfare and other emerging issues. The NFHS-5 survey work has been conducted in around 6.1 lakh samplehouseholds from 707 districts (as on March, 2017) of the country; covering724,115 women and 101,839 men to provide disaggregated estimates up to districtlevel.
- एनएफएचएस को लगातार कई दौरों में जारी करने का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा अन्य उभरते मुद्दों से संबंधित विश्वसनीय और तुलनात्मक डेटा प्रदान करना है। एनएफएचएस-5 सर्वेक्षण कार्य देश के 707 जिलों (मार्च, 2017 तक) के लगभग 6.1 लाख नमूना परिवारों में किया गया है, जिसमेंजिला स्तर तक अलग-अलग अनुमान प्रदान करने के लिए 724,115 महिलाओं और 101,839 पुरुषों को शामिल किया गया।


- The all-India and State/UT level factsheet released includes information on 131 key indicators. It provides information on important indicators which arehelpful in tracking the progress of Sustainable Development Goals (SDGs) in thecountry. NFHS-4 (2015-16) estimates were used as baseline values for a largenumber of SDG indicators. Many indicators of NFHS-5 are similar to NFHS-4carried out in 2015-16 to make possible comparisons over time. However, NFHS-5 includes some new focal areas, such as death registration, pre-school education,expanded domains of child immunization, components of micro-nutrients tochildren, menstrual hygiene, frequency of alcohol and tobacco use, additional components of non-communicable diseases (NCDs), expanded age ranges formeasuring hypertension and diabetes among all aged 15 years and above, whichwill give requisite input for strengthening existing programmes and evolving new strategies for policy intervention.
- अखिल भारतीय तथा राज्य/केंन्द्र शासित प्रदेशके स्तर पर जारी किए गए फैक्टशीट में 131 प्रमुख संकेतकों की जानकारी शामिल है। यह महत्वपूर्ण संकेतकों के बारे में जानकारी प्रदान करता है जो देश में सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्रगति को ट्रैक करने में सहायक होते हैं। एनएफएचएस-4 (2015-16) अनुमानों का उपयोग बड़ी संख्या में एसडीजी संकेतकों के लिए आधारभूत मूल्यों के रूप में किया गया था। एनएफएचएस-5 के कई संकेतक 2015-16 में किए गए एनएफएचएस-4 के समान हैं,जो समय के साथ तुलना कोसंभव बनाते हैं। हालांकि, एनएफएचएस-5 में विशेष ध्यान वाले कुछ नए क्षेत्र शामिल हैं, जैसे मृत्यु पंजीकरण, पूर्व-विद्यालय शिक्षा, बाल टीकाकरण के विस्तारित क्षेत्र, बच्चों के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों के घटक, मासिक धर्म स्वच्छता, शराब एवं तंबाकू के उपयोग की आवृत्ति, गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) के अतिरिक्त घटक रोग, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी लोगों में उच्च रक्तचाप और मधुमेह को मापने के लिए विस्तारित आयु सीमा, जो मौजूदा कार्यक्रमों को मजबूत करने तथा नीतिगत हस्तक्षेप के लिए नई रणनीति विकसित करने के लिए आवश्यक विवरण देगा।

State TFR-5 TFR-4 SR-5 SR-4
A&N 1.3 1.4 963 977
AP 1.7 1.8 1045 1021
Assam 1.9 2.2 1012 993
Bihar 3 3.4 1090 1062
D&N 1.8 2.1 827 813
Goa 1.3 1.7 1027 1018
Gujarat 1.9 2 965 950
HP 1.7 1.9 1040 1078
J&K 1.4 2 948 971
Karnataka 1.7 1.8 1034 979
Kerala 1.8 1.6 1121 1049
Lakshadweep 1.4 1.8 1187 1022
Ladakh 1.3 2.3 971 1000
Maharashtra 1.7 1.9 966 952
Meghalaya 2.9 3 1039 1005
Manipur 2.2 2.6 1066 1049
Mizoram 1.9 2.3 1018 1012
Nagaland 1.7 2.7 1007 968
Sikkim 1.1 1.2 990 942
Telangana 1.8 1.8 1049 1007
Tripura 1.7 1.7 1011 998
WB 1.6 1.8 1049 1007
Arunachal 1.82 2.1 997 958
Chattisgarh 1.82 2.2 1015 1019
Haryana 1.9 2.1 926 876
Jharkhand 2.3 2.6 1050 1002
MP 2 2.3 970 948
Odisha 1.8 2.1 1063 1036
Punjab 1.6 1.6 938 905
Rajasthan 2 2.4 1009 973
TN 1.8 1.7 1088 1033
UP 2.4 2.7 1017 995
Uttarakhand 1.9 2.1 1016 1015
Chandigarh 1.4 1.6 917 934
Delhi 1.6 1.8 913 854
Puduchery 1.5 1.7 1112 1068

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